जयपुर। राज्य सूचना आयोग ने सूचना आवेदनों की अनदेखी और सूचना मुहैया कराने में कोताही बरतने के मामलो में ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के प्रति सख्ती दिखाई है। आयोग ने लूणकरणसर के विकास अधिकारी पर दस हजार रूपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने निम्बाहेड़ा के विकास अधिकारी और गंगानगर जिले में एक ग्रामीण विकास अधिकारी पर पांच हजार रूपये की शास्ति आरोपित की है। इसके साथ ही आयोग ने पिछले कुछ दिनों में बारह ग्रामीण विकास अधिकारियों पर दो दो हजार रूपये का जुर्माना लगाया है।
सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने तीन साल तक एक नागरिक को सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर लूणकरणसर के विकास अधिकारी के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की और दस हजार रूपये का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है। इस मामले में एक स्थानीय नागरिक बी एल शर्मा ने आयोग में अपील दायर कर कहा कि उन्हें तीन साल से भी अधिक का वक्त गुजरने के बाद भी सूचना नहीं दी गई है। शर्मा ने वर्ष 2018 में एक अर्जी दाखिल कर लूणकरणसर में छह पेंशनधारियों के वजूद को लेकर जानकारी मांगी थी। इन पेन्शनधारियो को प्रतिमाह 750 रूपये पेंशन मिलती है। विकास अधिकारी ने पहले इसे कोषाधिकारी से संबद्ध बताया। लेकिन कोषाधिकारी ने कहा पेंशनधारी का भौतिक सत्यापन विकास अधिकारी करते है। इसके बावजूद भी शर्मा को सूचना नहीं दी गई। इस पर आयोग ने नाराजगी जाहिर करते हुए विकास अधिकारी को रिकॉर्ड के मुताबिक 15 दिन में सूचना देने का निर्देश दिया है। साथ ही आयोग के आदेश की प्रति संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को भेजने का निर्देश दिया है।
आयोग ने गंगानगर जिले में चूनावढ़ के ग्रामीण विकास अधिकारी पर पांच हजार रूपये का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है। आयोग ने कई बार नोटिस जारी कर अधिकारी को अपना पक्ष रखने को कहा। लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। चित्तोड़गढ़ में निम्बाहेड़ा के विकास अधिकारी पर भी आयोग ने पांच हजार रूपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह जुर्माना तब लगाया जब एक स्थानीय नागरिक ने आयोग में शिकायत की कि उन्हें सामुदायिक विकास कार्यो के निर्माण की जानकारी नहीं दी जा रही है। सूचना आयुक्त बारेठ ने भिन्न भिन्न जिलों में कोई एक दर्जन ग्रामीण विकास अधिकारियों पर सूचना कानून की अवहेलना करने पर दो दो हजार रूपये की शास्ति आरोपित करने का आदेश दिया है। इनमे राजसमंद ,बांसवाड़ा ,बीकानेर और गंगानगर जिलों के ग्राम विकास अधिकारी शामिल है।
आयोग ने इन अधिकारियो को नागरिको को वांछित सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
इससे पहले आयोग ने अपने एक अन्य आदेश में ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग को सूचना अधिकार कानून की धारा 4 की पालना पुख्ता करने का निर्देश दिया था। इसके तहत आम अवाम से जुड़ी जरूरी सूचनाएं और निर्णय स्वत स्फूर्त सार्वजनिक पटल पर प्रकाशित और प्रसारित करने का प्रावधान है। बहरहाल सूचना आयोग के इस एक्शन की तारीफ भी की जा रही है।