जयपुर। महिला आरपीएस से दुर्व्यवहार करने के मामले में अधिवक्ता गोवर्धन सिंह को जयपुर के एडीजे कोर्ट नम्बर-2 में सोमवार को जमानत दे दी। सोमवार को मुकदमे की सुनवाई हुई और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने और तमाम साक्ष्यों, परिस्थितियों को देखते हुए न्यायाधीश विजय प्रकाश सोनी ने 1 लाख रुपए की जमानत और 1 लाख के निजी मुचलके पर गोवर्धन सिंह को जमानत दे दी।
गोवर्धन सिंह के अधिवक्ता एके जैन ने बताया कि एफआईआर में आईपीसी की धारा- 193, 353, 354, 500, 501 और 509, एससी-एसटी एक्ट की धारा 3/1 और 3/2, आईटी एक्ट की धारा-67 का आरोप लगाया गया है। हमने कोर्ट को बताया गया कि गोवर्धन सिंह ने 30 मार्च 2020 को महिला पुलिस अधिकारी संध्या यादव की ओर से खुदको जानबूझकर इंटेशनली रोकने, धमकी देने और बदतमीजी करने, पुरानी रंजिश होने और भविष्य में रिपोर्ट दर्ज करवाने की चिन्ता जताते हुए रिपोर्ट दी थी। जिसे सदर थाने ने दर्ज नहीं किया। उसके 4 दिन बाद आरपीएस संध्या यादव ने उस शिकायत के काउंटर में अपने बचाव में रिपोर्ट दर्ज करवाई है।
रिपोर्ट में एससी-एसटी एक्ट और 354 का आरोप नहीं बनता है। पिछले 11 दिन से विक्टिम पुलिस कस्टडी में है। इस आधार पर कोर्ट ने जमानत मंजूर की है।
कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक हटने के बाद जयपुर की सदर थाना पुलिस ने 27 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट परिसर से गोवर्धन सिंह को गिरफ्तार किया था। पूर्व एसीपी संध्या यादव ने 3 अप्रैल 2020 को गोवर्धन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, उस मामले में यह गिरफ्तारी हुई। शिकायत के मुताबिक 30 मार्च 2020 को कोविड लॉकडाउन के दौरान खासाकोठी पुलिया के नीचे एसीपी संध्या यादव ने ड्यूटी के दौरान नाकाबंदी पर गोवर्धन सिंह और अन्य व्यक्तियों की कार रोककर पूछताछ की थी। इस दौरान गोवर्धन सिंह और अन्य लोगों ने महिला पुलिस अधिकारी से अभद्र भाषा बोली। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। केस की शुरूआती जांच एसीपी प्रमोद स्वामी ने कर जुर्म को प्रमाणित माना। इसके बाद जिन पुलिस अधिकारियों को जांच सौंपी गई सभी ने जुर्म प्रमाणित माना। गोवर्धन सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ अलग-अलग थानों में 3 मामले और दर्ज किए हैं। सदर थाना, वैशाली नगर थाना और विधायकपुरी थाने में ये मुकदमे दर्ज हुए हैं। किसी में पिस्तौल दिखाकर 1 करोड़ रुपए मांगने, किसी में डराने धमकाने और पैसे छीनने जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुलिस किसी भी मामले में फिर से उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।