राजस्थान BJP ने अब गहलोत सरकार द्वारा बोर्ड-निगमों में 11 विधायकों की नियुक्ति को बताया अवैधानिक


जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा बोर्ड-निगमों में 11 विधायकों को नियुक्ति के मामले में BJP विधायक एवं प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने विधायकों को दी गई इन नियुक्तियों को अवैधानिक बताते हुए राज्यपाल कलराज मिश्र से इसे रोकने के लिए मुख्यमंत्री को निर्देशित करने की मांग की है।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने राज्यपाल कलराज मिश्र को लिखे 4 पेज के पत्र में आंध्र प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और मुंबई हाईकोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 166 और 167 के तहत गहलोत सरकार द्वारा की गई यह नियुक्तियां अवैधानिक हैं। राठौड़ ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह मुख्यमंत्री को नियुक्तियां निरस्त करने के लिए निर्देशित करें। राज्यपाल को इस संबंध में पत्र लिखकर राठौड़ ने कहा कि जिन विधायकों को बोर्ड-निगमों में नवाजा गया है वह दोहरे लाभ की श्रेणी में आता है तथा असंवैधानिक भी है।

उन्होंने इस संबंध में पूर्व में हुए निर्णयों और संविधान में उल्लेखित लाभ के पद की परिभाषा का हवाला देते हुए कहा है कि गहलोत सरकार प्रारंभ से ही अंर्तविरोध से ग्रसित रही है और अपने आंतरिक विद्रोह को शांत करने के लिए इस तरह पदों पर रेवड़ी बांट कर असंतुष्ट विधायकों को संतुष्ट करने का प्रयास कर रही हैं। पहले 21 नवम्बर को 6 विधायकों को अवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री सलाहकार के पद पर नियुक्ति दी गई और अब 9 फरवरी 2022 को 11 विधायकों को बोर्ड-निगमों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष बनाया गया है।

राठौड़ की ओर से अब जिन 11 विधायकों की नियुक्ति को अवैधानिक बताते हुए राज्यपाल के पास शिकायत भेजी है उसमें किसान आयोग के अध्यक्ष महादेवसिंह खण्डेला व उपाध्यक्ष दीवचंद खेरिया, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रफीक खान, राजस्थान अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी राम बैरवा, राजस्थान गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष मेवाराम जैन, राजस्थान वक्फ विकास परिषद के अध्यक्ष हाकीम अली खान, डांग क्षेत्रीय विकास मंडल अध्यक्ष लाखन सिह मीणा, देव नारायण बोर्ड के अध्यक्ष जोगिन्दरङ्क्षसह अवाना, राजस्थान राज्य क्रिड़ा परिषद अध्यक्ष कृष्णा पूनियां, राजस्थान अनुसूचित जनजाति के अध्यक्ष लक्ष्मण मीणा व उपाध्यक्ष रमीला खडिय़ा के नाम उल्लेखित है। ये सभी वर्तमान विधानसभा के सदस्य हैं।

राठौड़ इससे पहले मुख्यमंत्री सलाहकार बनाए गए डॉ.राजकुमार शर्मा, संयम लोढ़ा, डॉ.जितेन्द्र सिंह,बाबूलाल नागर, रामकेश मीणा व दानिश अबरार की शिकायत भी राठौड़ ने ही राज्यपाल को की थी। इस शिकायत का भी राठौड़ ने अपने पत्र में उल्लेख किया है और कहा है कि गहलोत इसी तरह से विधायकों की अवैधानिक नियुक्तियां कर सरकार को बचाएं रखने का अनुचित ढंग से प्रयास कर रही हैं। राठौड़ ने अपने 4 पृष्ठों के इस पत्र में इस संबंध में हुए पूर्व फैसलों और संविधानिक स्थिति का भी विस्तृत उल्लेख करते हुए कहा है कि इस तरह की नियुक्तियों की राजभवन को सूचना ना देकर संविधान के प्रावधानों का घोर उल्लधंन किया जा रहा हैं।

उधर सरकारी पक्ष का कहना है कि जिन विधायकों को नियुक्तियां दी गई है उन्हें किसी तरह का लाभ या सुविधा नहीं दी जा रही। ऐसे में ये लाभ के पद की श्रेणी में मामला आता ही नहीं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कल वोर्ड-निगम में नियुक्त अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की बैठक में कहा बताया कि नियुक्त विधायकों को किसी तरह का अलग से लाभ देय नहीं होगा।

बहरहाल इस मामले में सियासत गर्म है देखना होगा राज्यपाल इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेते हैं।