रूस-यूक्रेन संघर्ष: वैश्विक असर और चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच पूरा विश्व चिंतित


नई​ दिल्ली (अंजली दाधीच) रूस-यूक्रेन संघर्ष 2022 में शुरू हुआ था, और तब से यह संकट वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। इस संघर्ष ने न केवल यूरोप, बल्कि दुनिया भर में बड़े आर्थिक और सामाजिक बदलावों को जन्म दिया है।

ऊर्जा संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था

रूस दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा निर्यातक देश है, और यूक्रेन यूरोप को गैस पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है। संघर्ष के कारण रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और यूरोप में रूसी गैस की आपूर्ति में कटौती से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज़ी से वृद्धि हुई, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति दर बढ़ी और आर्थिक अस्थिरता पैदा हुई। यूरोप को विशेष रूप से सर्दियों में ऊर्जा आपूर्ति के संकट का सामना करना पड़ा, जिससे कई देशों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश करनी पड़ी। इसके चलते अक्षय ऊर्जा स्रोतों की ओर रुझान बढ़ा है।

खाद्य सुरक्षा पर असर

यूक्रेन और रूस दोनों ही वैश्विक खाद्य उत्पादन के महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं, खासकर गेहूं, मक्का, और सूरजमुखी तेल के मामले में। संघर्ष के कारण यूक्रेन से अनाज के निर्यात में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे विशेष रूप से अफ्रीका और मध्य पूर्व जैसे विकासशील क्षेत्रों में खाद्य संकट गहराया। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस संकट के कारण आने वाले समय में वैश्विक भूख की समस्या और बढ़ सकती है।

वैश्विक राजनीतिक ध्रुवीकरण

रूस-यूक्रेन संघर्ष ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ध्रुवीकरण को और गहरा किया है। पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं और यूक्रेन की सैन्य और आर्थिक सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके विपरीत, चीन और भारत जैसे कुछ देश तटस्थ रुख अपनाए हुए हैं और उन्होंने रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखे हैं। यह ध्रुवीकरण दुनिया को एक बार फिर से दो खेमों में बांटने का संकेत दे रहा है, जिसमें एक ओर पश्चिमी लोकतंत्र हैं और दूसरी ओर रूस और उसके सहयोगी।

सैन्य उन्नति और सुरक्षा चिंताएं

रूस-यूक्रेन संघर्ष ने नाटो और यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर मजबूर किया है। सैन्य उन्नति के इस नए दौर में हथियारों की दौड़ और वैश्विक शस्त्र व्यापार में वृद्धि हुई है। इससे दुनिया भर में स्थिरता और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, क्योंकि अन्य बड़े देश भी अपने सैन्य कार्यक्रमों में तेजी ला रहे हैं।

इस संघर्ष का अंत अभी तक अस्पष्ट है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव वैश्विक व्यवस्था पर गहरे और स्थायी होंगे।+