जयपुर/नई दिल्ली। समय बड़ा बलवान है। कभी कोई अर्श से फर्श पर होता है तो कभी फर्श से अर्श पर। खासकर राजनीति में यह अक्सर देखा जा सकता है। ऐसा ही ताज़ा उदाहरण है कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे दिवंगत अहमद पटेल के बेटे फैसल अहमद पटेल का। कांग्रेस पार्टी में अहमद पटेल का क्या कद और पद रहा है यह किसी से छुपा नहीं है।
अहमद पटेल एक ऐसा नाम रहे हैं, जिनकी दशकों तक राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में ऐसी धमक रही कि बड़े से बड़े नेता उनसे मिलने के लिए लाइन लगाकर खड़े रहते थे। उनसे फोन पर बात करने के लिए लम्बा इंतजार करते थे। लेकिन अहमद पटेल का कोरोना के चलते निधन हो गया। अहमद पटेल के गुजर जाने के बाद समय ऐसा बदला है कि राजस्थान CM के OSD शशिकांत शर्मा तक उनके बेटे का फोन नहीं उठाते। बार-बार फोन करने के बाद भी जब उनको CM OSD से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो दुखी होकर फैसल ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां कर दिया।

फैसल अहमद पटेल को लोगों के काम करवाने में कांग्रेस शासित राज्यों में ही दिक्कत आने लगी है, जिससे कार्यकर्ताओं के सामने उनकी छवि भी कमजोर होती है। ऐसे में फैसल पटेल ने सीएम ओएसडी शशिकांत के खिलाफ एक ट्वीट कर दिया हालांकि बाद में उन्होंने इस ट्वीट को डिलीट भी कर दिया। लेकिन उससे पहले ही सोशल मीडिया और भारतीय मीडिया में यह वायरल हो गया और अब इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी में बढ़ते मनमुटाव से जोड़कर भी इसे देखा जा रहा है।
हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि अशोक गहलोत की छवि इस तरह की नहीं है कि वह कांग्रेस नेताओं या उनके परिवार वालों को रिस्पांस ना करें। यह सीएम ओएसडी शशिकांत शर्मा की निजी स्तर पर रही एक कमी है जिसको सुधारने की जरूरत है। क्योंकि इससे सीधा असर मुख्यमंत्री की छवि पर पड़ता है।
जानकार बताते हैं कि मुख्यमंत्री की छवि ऐसी रही है कि वह कांग्रेस के दिवंगत नेताओं के परिजनों का हमेशा ख्याल रखते हैं और कई अवसर ऐसे भी आए हैं जब वह खुद व्यक्तिगत तौर पर उनका हालचाल जानने उनके घर पहुंचे हैं।
ऐसे में फैसल अहमद पटेल का फोन नहीं उठाने या रिप्लाई न करने का कोई कारण ही नहीं बनता। वैसे भी अशोक गहलोत के अहमद पटेल से हमेशा बेहतर रिश्ते रहे थे। दोनों की जबरदस्त बॉन्डिंग के चलते हैं कई बार कांग्रेस को राजनीतिक संकट से निकालने में कामयाबी मिली। आज भले ही अहमद पटेल इस दुनिया में नहीं है लेकिन यदि यह मामला अशोक गहलोत की नॉलेज में होता तो वह जरूर इस मामले में एक्शन लेते। हालांकि बाद में ट्वीट डिलीट कर दिया गया, लेकिन अब सोशल मीडिया पर यह वायरल हो रहा है।